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  रोस्तोव का वृद्धि अवस्था मॉडल

  रोस्तोव का वृद्धि अवस्था मॉडल

1.- क्या है- अमेरिकी विद्वान डब्लू डब्लू रोस्तोव ने1971 में  प्रतिपादित
द स्टेजेस ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ में PhD
विकास का 5 चरणीय अनुक्रम
2.  उद्देश्य- पूंजीवाद के प्रति  झुकाव
कोई भी समाज आखेटक से पूर्ण विकसित समाज में परिवर्तित हो सकता है इसके लिए पुन पूंजीवादी                      विकास मॉडल का अनुकरण करना होगा जिसके पांच चरण है|

3. पांच चरणीय अनुक्रम-
i.पारंपरिक समाज- अर्थव्यवस्था कृषि एवं आखेटन आधारित
बजट का अधिकांश भाग सेना में प्रयुक्त,
धर्म का अधिक प्रभाव, साक्षरता का निम्नस्तर, निम्न नगरीकरण एवं औद्योगिक करण
उदा.- उप सहारा व मध्य अफ्रीकी देश
ii. उत्प्रस्थान पूर्व की अवस्था-
बुद्धिजीवी वर्ग का उदय, विकास एवं  उत्पादन में वृद्धि तथा छोटे उद्योगों का विकास
संरचनात्मक सुविधाओं पर बल
उत्पादन आधारित व्यवस्था परंतु सामाजिक आर्थिक विकास अधिक नहीं हो पाता
उदा. 19वीं शताब्दी के पांचवें दशक में भारत
iii.  उत्प्रस्थान- आत्म स्फूर्त  एवं छोटी समयावधि (10 से 30 वर्ष )
आधुनिक समाजों के जीवन में महान जल विभाजक
औद्योगिकरण एवं नगरीकरण में वृद्धि
iv. परिपक्वता की ओर प्रस्थान-
उद्योगों में विविधता
आयातों  में गिरावट  एवं निवेश जीडीपी का   10 से 20%  होता है।
शिक्षा, नगरीकरण एवं जीवन स्तर में वृद्धि
उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं का महत्व बढ़ जाता है|
उदा- अर्ध विकसित देशों की अर्थव्यवस्था जैसे दक्षिण व पूर्वी यूरोप
v. व्यापक उपभोग की अवस्था-
उपभोक्तावादी चरण- यूज एंड थ्रो का कल्चर
प्रति  व्यक्ति आय में वृद्धि
साक्षरता का स्तर 90% से ज्यादा, बेरोजगारी  का अभाव
नगरीय जनसंख्या 90% से अधिक
परिवार संस्थाओं का अभाव
उदा-अमेरिका, कनाडा, पश्चिमी यूरोप

आलोचना-
1. कोई भी समाज 100 वर्ष में  पूर्ण विकसित समाज नहीं बन सकता
2   मॉडल में वर्णित 5 चरणीय विकास की अवस्था आवश्यक नहीं है
3  तीसरी अवस्था में 10 से 20% पूंजी निवेश तार्किक  नहीं है
4  इस मॉडल में उपभोक्तावादी अवस्था को आदर्श माना है परंतु इस अवस्था में सामाजिक मूल्य विघटित हो जाते हैं     तथा नारी का शोषण भी बढ़ जाता है|

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